Thursday, October 31, 2013

गेंदबाज़ी कि मौत


कुछ वक़्त पहले टीवी पर एक नामचीन सीमेंट कंपनी के विज्ञापन आता था जिसमें एक लड़की नन्हे मुन्ने से कपड़ो में समंदर से निकलती थी और पीछे से आवाज़ आती थी "विश्वास है इसमें कुछ ख़ास है।" आज तक समझ नहीं आया कि वे किसकी बात कर रहे थे, लड़की कि या सीमेंट की। शायद advt एजेंसी वालों को लगा होगा कि शेविंग क्रीम से लेकर मर्दाना जाँघिया तक जब स्त्री चेहरे दिखा कर बिक रहे है तो शायद यह भी बिक जायेगा। दोष उनका नहीं है, हर सोच पर बाज़ार हावी है। व्यावसायीकरण के इस दौर में बिक्री बढ़ाने के लिए कोई भी हथकंडा जायज है। 
कुछ यही हाल क्रिकेट का हो गया है। टेस्ट मैच तो पहले ही बमुश्किल कोई देखता था अब ट्वेंटी ट्वेंटी के आने के बाद एकदिवसीय के लिए भी दर्शक जुटा पाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में इस तरह के नियम बनाये जा रहे है कि चौके छक्कों कि बरसात हो और खेल में लोगो का interest बना रहे। हर छोर से अलग अलग गेंद, सामान्य ओवर्स में भी सिर्फ चार खिलाड़ियों को दायरे के बाहर खड़ा कर सकने कि बाध्यता और ऊपर से बैटिंग के लिए मददगार पिच। यह सब गेंदबाज़ो के लिए एक दुःस्वप्न कि तरह है। पहले ही पिच से कोई उम्मीद नहीं ऊपर से भारी बल्लो से लग कर गेंद सीधा बाउंड्री का मुंह देखती है, ऐसे में गेंदबाज़ बेबस से नज़र आते है। मुल्क भर में दुश्मन कि तरह देखे जाते है सो अलग। 
पहले ही गली मोहल्ले का कोई लड़का गेंदबाज़ नहीं बनाना चाहता हर किसी को चौक्के छक्के जमाने कि ख्वाहिश रहती है ऊपर से खेल पर बाज़ार इसी तरह हावी रहा और उसकी मूल भावना के साथ यूँ ही खिलवाड़ किया जाता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब कपिल देव और शेन वार्न जैसे नाम सुन लोग आश्चर्य से भर जाया करेंगे और गेंदबाज़ी कि कला का अंत हो जायेगा। 


किसके हैं सरदार पटेल ?

उन्नाव के एक साधू ने जब सपने में 1000 टन सोना देखा तो वहाँ पुरातन विभाग कि टीम के साथ उस खजाने पर अपना हक़ जतलाने वाले कई तथाकथित वंशज भी पहुँच गए। कोई खुद को राजा का वंशज बतलाने लगा तो कोई स्वयं को सेनापति के खानदान कि पैदाइश। जहाँ राज्य सरकार पूरे के पूरे सोने को अपना बताया तो वहीं गाँव वालों ने खजाने में अपना हिस्सा मांगने में देर ना लगायी। Airport से लेकर यूनिवर्सिटी तक कि मांग हो गयी। खुदाई ख़त्म हो गयी और सबको मिला बाबा जी का ठुल्लु। 
आजकल यही हाल सरदार वल्लभ भाई पटेल और जय प्रकाश नारायण का है। एक तरफ जहां कांग्रेसी सरदार पटेल और नितीश JP पर अपना copyright बता रहे है, वहीं दूसरी तरफ Narendra Modi ने बड़ी चतुराई से लोह पुरुष और जय प्रकाश को कांग्रेस और JDU कि झोली से चुरा अपना ब्रांड एम्बेसडर बना लिया। कांग्रेसी बौखला गए है, नितीश का पारा चढ़ा हुआ है पर कुछ भी कहिये आखिरकार इस मुल्क को नेहरू गांधी परिवार के अलावा भी किसी और के बलिदान कि याद आ ही गयी। 
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Thursday, October 24, 2013

Sharad Power

एक ज़माना था जब आलू और प्याज गरीबी रेखा के नीचे आते थे। मिडिल क्लास भिन्डी और हाई क्लास मटर तो इनकी तरफ नज़र उठाकर भी नहीं देखते थे। पर मियाँ वक़्त हमेशा एक सा नहीं रहता। एक रोज़ प्याज की "Sharad Power" लाटरी लग गयी और देखते ही देखते कल का BPL प्याज भी आज fuji apple की बराबरी कर रहा है। आजकल तो Mercedes में आता जाता है। सिर्फ बड़े बंगले वालों के यहाँ ही उठता बैठता है। छोटे गरीबों के तो मुंह भी नहीं लगता। अब तो दर्शन भी दुर्लभ है श्रीमान के। बड़े बड़े लोग बड़ी बड़ी बातें। 

ऐसा नहीं की किस्मत सिर्फ श्रीमान प्याज की ही बदली हो। अरे भाई साहब "Sharad Power" लाटरी ने कईयों को आसमान की ऊचाइयों तक पहुंचा दिया है। अब "चीनी" को ही ले लीजिये। कल तक बेचारी मिडिल क्लास थी, लाटरी क्या लगी अब तो हाथ ही नहीं आती। यही कुछ हाल Mr दूध का भी है। कुल मिलकर "Sharad Power" ही असली "Power" है। 

Wednesday, October 23, 2013

नौटंकी साला

बहादुर शाह जफ़र का नाम तो सुना ही होगा, अंतिम मुग़ल शासक थे। दिल से कवि थे, सत्ता का कोई मोह न था ना ही राज करने की ability थी। मुल्क गया अंग्रेजों के और खुद गए अल्लाह के पास। कुल मिलाकर गलत आदमी गलत जगह। 
कुछ यही हाल राहुल गांधी का भी है। कभी पिछड़ों को jupiter पर पहुंचा देते हैं, तो कभी मध्यप्रदेश की जनसभा में जुबान पर तेल लगा कर पहुँच जाते हैं और बोल बच्चन महिलाओं के साथ भ्रष्टचार कर बैठते है। कोई तरकीब ना चली तो आज emotional कार्ड खेलने से भी गुरेज ना किया। बोला "दादी, पापा को मारा अब मुझे भी मार डालेंगे।" हद्द करते हो राहुल बाबा, सही में हद्द हो गयी। बेटा यही हाल रहा ना तो 2014 में तुम्हारी अम्मा भी नरेन्द्र मोदी को वोट दे देगी।